📍 अंता, राजस्थान
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🚜 द्वारकी लाल कुशवाह फार्म - ताज़ा गैलरी
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सरसों
हमारे बारे में
द्वारकी लाल कुशवाह फार्म राजस्थान के अंता (बारां) क्षेत्र का एक प्रमुख कृषि केंद्र है। हम शुद्धता और आधुनिक खेती के तरीकों पर विश्वास करते हैं।
- 🌱 स्थान: नागदा की झोपड़ियाँ, ठिकारिया, अंता (राजस्थान)
- 🚜 विशेषता: उन्नत कृषि तकनीक और पशुपालन
- 📍 सेवा क्षेत्र: अंता और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र
नया अपडेट:
मंडी भाव
Dwarki Lal Kushwah Farm
📍 Aaj ka Mandi Bhav (Anta/Baran)
| Fasal (Crop) | Bhav (Per Qtl) |
|---|---|
| 🧄 Lahsun (Garlic) | ₹9,500 - 15,000 |
| 🌱 Sarson (Mustard) | ₹5,200 - 5,800 |
| 🌾 Soyabean | ₹4,100 - 4,600 |
| 🌾 Gehu (Wheat) | ₹2,400 - 2,800 |
Update Time: 23 March 2026 | *Bhav Mandi ke anusar badal sakte hain.
गेहूं की उन्नत खेती कैसे करे?
🌾 गेहूं की उन्नत खेती 🚜
स्टेप-बाय-स्टेप संपूर्ण जानकारी
(इमेज: गेंहू के हरे-भरे खेत - द्वारकी लाल कुशवाह फार्म)
⛰️ 1. खेत की तैयारी
सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए रोटावेटर चलाएं और समतल कर लें। इससे जलभराव नहीं होगा।
🌱 2. उन्नत बीजों का चयन
अपने क्षेत्र और मिट्टी के अनुसार उन्नत किस्मों (जैसे HD 2967, PBW 550, राज 4037) का चयन करें। बुवाई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें।
⏳ 3. बुवाई का सही समय
समय पर बुवाई (नवंबर का महीना) सबसे उपयुक्त है। पछेती बुवाई से पैदावार कम हो सकती है। बीज की गहराई 4-5 सेमी रखें।
💧 4. सिंचाई प्रबंधन
गेहूं को 4-6 सिंचाइयों की जरूरत होती है। पहली सिंचाई बुवाई के 21-25 दिन बाद (CRI स्टेज) बहुत जरूरी है। दाने भरते समय पानी की कमी न होने दें।
🍃 5. खाद और उर्वरक
मिट्टी परीक्षण के आधार पर DAP, यूरिया और पोटाश का प्रयोग करें। यूरिया की आधी मात्रा बुवाई के समय और आधी पहली दो सिंचाइयों पर दें।
✂️ 6. कटाई और मड़ाई
जब फसल पूरी तरह पक जाए और दाने कड़क हो जाएं, तब कटाई करें। कटाई के बाद कंबाइन हार्वेस्टर या थ्रेशर से मड़ाई करें।
सरसो की खेती कैसे करे?
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| Sarso |
सरसों की खेती: कम लागत में बंपर पैदावार पाने का सही तरीका
भारत में सरसों एक प्रमुख तिलहन (Oilseed) फसल है। राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसे बड़े स्तर पर उगाया जाता है। सरसों की खेती न केवल कम पानी में संभव है, बल्कि यह किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा भी देती है।
1. बुवाई का सही समय और जलवायु
सरसों एक रबी की फसल है जिसे ठंडी और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है।
सही समय: 15 सितंबर से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई करना सबसे अच्छा माना जाता है।
तापमान: अंकुरण के समय 25°C से 30°C और फसल पकते समय ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है।
2. मिट्टी और खेत की तैयारी
सरसों के लिए बलुई दोमट (Sandy Loam) मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
सबसे पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें।
मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए पाटा (Leveler) चलाएं ताकि नमी सुरक्षित रहे।
खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 4-5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालना बहुत फायदेमंद होता है।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
अच्छी पैदावार के लिए बीज का चयन सोच-समझकर करें:
पूसा मस्टर्ड (Pusa Mustard-25, 27, 28)
RH-30 और RH-749
गिरिराज (यह किस्म राजस्थान के किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय है)
4. बीज की मात्रा और उपचार
मात्रा: एक एकड़ के लिए लगभग 1.5 से 2 किलो बीज पर्याप्त होता है।
बीज उपचार: मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बीज को थीरम (Thiram) या कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) से उपचारित जरूर करें।
दूरी: कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेमी रखनी चाहिए।
5. खाद और उर्वरक का प्रबंधन
सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर (गंधक) का बहुत बड़ा महत्व है।
बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ 10-15 किलो सल्फर प्रति एकड़ जरूर डालें।
इससे दानों में चमक आती है और तेल का प्रतिशत बढ़ता है।
6. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
सरसों को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती।
पहली सिंचाई: फूल आने से ठीक पहले (बुवाई के 30-35 दिन बाद)।
दूसरी सिंचाई: फलियाँ बनते समय (बुवाई के 65-70 दिन बाद)।
खरपतवार हटाने के लिए बुवाई के 20-25 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें।
7. कीट और रोग नियंत्रण
सरसों की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान चेपा (Aphids) कीट पहुँचाते हैं।
इसके बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें या कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें।
यदि किसान भाई सही समय पर बुवाई करें, सल्फर का प्रयोग करें और समय पर कीटों से बचाव करें, तो सरसों की खेती से बहुत अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
लहसुन की खेती कैसे करे?
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| Lahsun |
लहसुन की उन्नत खेती: बुवाई से लेकर कमाई तक की पूरी जानकारी
लहसुन (Garlic) न केवल एक मसाला है, बल्कि यह अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। भारत में इसकी मांग साल भर रहती है, जिससे किसानों को इसका अच्छा भाव मिलता है। आइए जानते हैं कि लहसुन की खेती को सफल कैसे बनाया जाए।
1. उपयुक्त समय और जलवायु
लहसुन की खेती के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।
बुवाई का समय: उत्तर भारत में अक्टूबर से नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है।
तापमान: कंद (bulb) बनने के समय 15°C से 25°C का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है।
2. मिट्टी का चयन और खेत की तैयारी
लहसुन के लिए दोमट मिट्टी (Loamy Soil) सबसे उत्तम है।
खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।
खेत की तैयारी के समय 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिलाएं। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 2-3 बार जुताई करें।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
अच्छी पैदावार के लिए अपने क्षेत्र के हिसाब से किस्मों का चुनाव करें:
जी-1 (यमुना सफेद): यह किस्म निर्यात के लिए अच्छी है।
जी-41: इसके कंद बड़े और सफेद होते हैं।
जी-282: यह जल्दी पकने वाली किस्म है।
भीमा पर्पल: इसका रंग हल्का बैंगनी होता है और पैदावार अधिक मिलती है।
4. बुवाई की विधि
लहसुन की बुवाई बीज से नहीं, बल्कि इसकी कलियों (Cloves) से की जाती है।
बीज दर: एक एकड़ के लिए लगभग 2 से 2.5 क्विंटल स्वस्थ कलियों की आवश्यकता होती है।
दूरी: कतार से कतार की दूरी 15 सेमी और कलियों के बीच की दूरी 8 से 10 सेमी रखें।
गहराई: कलियों को मिट्टी में 3-5 सेमी गहरा गाड़ें।
5. सिंचाई प्रबंधन
पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें।
सर्दी के मौसम में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें।
ध्यान रहे, खुदाई से 15-20 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए ताकि कंद अच्छी तरह सूख सकें।
6. खाद और उर्वरक
लहसुन को पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर 100 किलो नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस और 50 किलो पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही, सल्फर का उपयोग कंदों की चमक और गंध बढ़ाने में मदद करता है।
7. रोग और कीट नियंत्रण
थ्रिप्स (Thrips): यह लहसुन का प्रमुख कीट है जो पत्तियों का रस चूसता है। इसके बचाव के लिए नीम का तेल या विशेषज्ञ की सलाह से कीटनाशक का प्रयोग करें।
झुलसा रोग (Blight): पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखने पर फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
8. खुदाई और भंडारण
जब लहसुन की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब समझ लें कि फसल तैयार है। खुदाई के बाद लहसुन को 2-3 दिन छाया में सुखाएं। इसके बाद इसकी छंटाई करके सूखे स्थान पर स्टोर करें।
हरी मिर्च की खेती कैसे करे?
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| Green chilli |
मिर्च की उन्नत खेती कैसे करें: अधिक मुनाफे के लिए संपूर्ण गाइड
भारत में मिर्च एक ऐसी फसल है जिसकी मांग साल भर बनी रहती है। चाहे हरी मिर्च हो या लाल, किसान भाई इसकी सही तकनीक से खेती करके कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आज के इस लेख में हम मिर्च की सफल खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा करेंगे।
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
मिर्च की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे अच्छी मानी जाती है।
तापमान: फसल के विकास के लिए 15°C से 35°C का तापमान आदर्श है।
मिट्टी: जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी का pH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए।
2. उन्नत किस्में
अधिक पैदावार के लिए हमेशा हाइब्रिड या उन्नत किस्मों का ही चयन करें।
तीखी मिर्च: पूसा ज्वाला, पंत सी-1, अर्का मेघना।
कम तीखी/मोटी मिर्च: बुल नोज, कैलिफोर्निया वंडर (शिमला मिर्च के लिए)।
स्थानीय बाजार की मांग: बीज खरीदने से पहले अपने पास की मंडी में मांग की जांच जरूर कर लें।
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| Green chilli |
3. नर्सरी तैयार करना और रोपाई
मिर्च के बीजों को सीधा खेत में नहीं बोया जाता, पहले नर्सरी तैयार की जाती है।
बीज दर: एक हेक्टेयर के लिए लगभग 1 से 1.5 किलो बीज पर्याप्त होता है।
रोपाई का समय: जब पौधे 4-5 पत्तों के हो जाएं (लगभग 30-35 दिन बाद), तब उन्हें मुख्य खेत में लगा दें।
दूरी: कतार से कतार की दूरी 60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेमी रखें।
4. खाद और उर्वरक प्रबंधन
मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद डालें। सामान्यतः खेत की तैयारी के समय 15-20 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं। इसके अलावा नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें।
5. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
मिर्च को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहनी चाहिए। फूल आने के समय पानी की कमी न होने दें।
खेत को साफ रखने के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें ताकि कीटों का प्रकोप कम हो।
6. प्रमुख रोग और बचाव
मरोड़िया रोग (Leaf Curl): यह सफेद मक्खी के कारण होता है। इससे पत्तियां मुड़ जाती हैं। इसके बचाव के लिए नीम के तेल या उचित कीटनाशक का छिड़काव करें।
फल सड़न: इसके लिए जल निकासी का उचित प्रबंध रखें।
निष्कर्ष
मिर्च की खेती अगर वैज्ञानिक तरीके से की जाए, तो यह किसानों के लिए 'नकद कमाई' का बेहतरीन जरिया है। सही समय पर तुड़ाई और अच्छी पैकिंग से आप बाजार में ऊंचे दाम प्राप्त कर सकते हैं।
चावल की खेती कैसे करे?
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| Paddy |
धान की उन्नत खेती: बुवाई से कटाई तक की संपूर्ण जानकारी
भारत में चावल मुख्य भोजन है और इसकी खेती देश के लगभग हर हिस्से में की जाती है। सही तकनीक और प्रबंधन से किसान भाई धान की फसल से बंपर पैदावार ले सकते हैं। आइए जानते हैं धान की सफल खेती के मुख्य चरण:
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
धान एक ऊष्णकटिबंधीय (Tropical) फसल है जिसे अधिक गर्मी और पानी की आवश्यकता होती है।
तापमान: फसल के विकास के लिए 20°C से 37°C का तापमान सबसे अच्छा होता है।
मिट्टी: जलधारण क्षमता वाली चिकनी या दोमट मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
2. बुवाई का सही समय
धान की खेती मुख्य रूप से खरीफ (Monsoon) सीजन में की जाती है।
नर्सरी की तैयारी: मई के अंत से जून के मध्य तक।
मुख्य खेत में रोपाई: जून के अंत से जुलाई के मध्य तक।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
किस्मों का चुनाव अपनी क्षेत्र की जलवायु और पानी की उपलब्धता के आधार पर करें:
कम समय वाली: पूसा-1509, पीआर-126।
मध्यम समय वाली: सरबती, पूसा सुगंध-5।
देरी से पकने वाली (बासमती): पूसा बासमती-1121, 1718, 1401।
सिंचित क्षेत्रों के लिए: जया, आईआर-64, महामाया।
4. नर्सरी तैयार करना और रोपाई
धान की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है।
बीज दर: प्रति हेक्टेयर लगभग 30-40 किलो बीज (सामान्य) या 15-20 किलो (हाइब्रिड) की आवश्यकता होती है।
बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक (जैसे कार्बेन्डाजिम) से उपचारित जरूर करें।
रोपाई: जब नर्सरी के पौधे 21-25 दिन के हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में लगाएं। पौधों के बीच की दूरी 20 सेमी x 15 सेमी रखें।
5. खाद और उर्वरक प्रबंधन
खेत तैयार करते समय 10-15 टन गोबर की खाद डालें। इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट का प्रयोग करें। (धान में जिंक की कमी से 'खैरा रोग' होने का डर रहता है)।
6. जल प्रबंधन
धान को पानी की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। रोपाई के बाद शुरुआती 15-20 दिनों तक खेत में 2-5 सेमी पानी भरा रहना चाहिए। दाना पकने के समय भी खेत में नमी का होना अनिवार्य है।
7. कीट और रोग नियंत्रण
तना छेदक (Stem Borer): इसके लिए उचित कीटनाशक का प्रयोग करें।
झुलसा रोग (Blight): इसके लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
खरपतवार: रोपाई के 2-3 दिन के भीतर खरपतवार नाशक (जैसे प्रेटिलाक्लोर) का उपयोग किया जा सकता है।
8. कटाई और मड़ाई
जब धान की बालियां सुनहरी पीली हो जाएं और उनमें नमी 20% के आसपास हो, तब कटाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद थ्रेशर की मदद से दानों को अलग कर सुखा लें।


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