📍 अंता, राजस्थान
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हमारे बारे में
द्वारकी लाल कुशवाह फार्म राजस्थान के अंता (बारां) क्षेत्र का एक प्रमुख कृषि केंद्र है। हम शुद्धता और आधुनिक खेती के तरीकों पर विश्वास करते हैं।
- 🌱 स्थान: नागदा की झोपड़ियाँ, ठिकारिया, अंता (राजस्थान)
- 🚜 विशेषता: उन्नत कृषि तकनीक और पशुपालन
- 📍 सेवा क्षेत्र: अंता और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र
नया अपडेट:
चावल की खेती कैसे करे?
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| Paddy |
धान की उन्नत खेती: बुवाई से कटाई तक की संपूर्ण जानकारी
भारत में चावल मुख्य भोजन है और इसकी खेती देश के लगभग हर हिस्से में की जाती है। सही तकनीक और प्रबंधन से किसान भाई धान की फसल से बंपर पैदावार ले सकते हैं। आइए जानते हैं धान की सफल खेती के मुख्य चरण:
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
धान एक ऊष्णकटिबंधीय (Tropical) फसल है जिसे अधिक गर्मी और पानी की आवश्यकता होती है।
तापमान: फसल के विकास के लिए 20°C से 37°C का तापमान सबसे अच्छा होता है।
मिट्टी: जलधारण क्षमता वाली चिकनी या दोमट मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।
2. बुवाई का सही समय
धान की खेती मुख्य रूप से खरीफ (Monsoon) सीजन में की जाती है।
नर्सरी की तैयारी: मई के अंत से जून के मध्य तक।
मुख्य खेत में रोपाई: जून के अंत से जुलाई के मध्य तक।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
किस्मों का चुनाव अपनी क्षेत्र की जलवायु और पानी की उपलब्धता के आधार पर करें:
कम समय वाली: पूसा-1509, पीआर-126।
मध्यम समय वाली: सरबती, पूसा सुगंध-5।
देरी से पकने वाली (बासमती): पूसा बासमती-1121, 1718, 1401।
सिंचित क्षेत्रों के लिए: जया, आईआर-64, महामाया।
4. नर्सरी तैयार करना और रोपाई
धान की खेती के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है।
बीज दर: प्रति हेक्टेयर लगभग 30-40 किलो बीज (सामान्य) या 15-20 किलो (हाइब्रिड) की आवश्यकता होती है।
बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक (जैसे कार्बेन्डाजिम) से उपचारित जरूर करें।
रोपाई: जब नर्सरी के पौधे 21-25 दिन के हो जाएं, तब उन्हें मुख्य खेत में लगाएं। पौधों के बीच की दूरी 20 सेमी x 15 सेमी रखें।
5. खाद और उर्वरक प्रबंधन
खेत तैयार करते समय 10-15 टन गोबर की खाद डालें। इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट का प्रयोग करें। (धान में जिंक की कमी से 'खैरा रोग' होने का डर रहता है)।
6. जल प्रबंधन
धान को पानी की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। रोपाई के बाद शुरुआती 15-20 दिनों तक खेत में 2-5 सेमी पानी भरा रहना चाहिए। दाना पकने के समय भी खेत में नमी का होना अनिवार्य है।
7. कीट और रोग नियंत्रण
तना छेदक (Stem Borer): इसके लिए उचित कीटनाशक का प्रयोग करें।
झुलसा रोग (Blight): इसके लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
खरपतवार: रोपाई के 2-3 दिन के भीतर खरपतवार नाशक (जैसे प्रेटिलाक्लोर) का उपयोग किया जा सकता है।
8. कटाई और मड़ाई
जब धान की बालियां सुनहरी पीली हो जाएं और उनमें नमी 20% के आसपास हो, तब कटाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद थ्रेशर की मदद से दानों को अलग कर सुखा लें।
