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हमारे बारे में
द्वारकी लाल कुशवाह फार्म राजस्थान के अंता (बारां) क्षेत्र का एक प्रमुख कृषि केंद्र है। हम शुद्धता और आधुनिक खेती के तरीकों पर विश्वास करते हैं।
- 🌱 स्थान: नागदा की झोपड़ियाँ, ठिकारिया, अंता (राजस्थान)
- 🚜 विशेषता: उन्नत कृषि तकनीक और पशुपालन
- 📍 सेवा क्षेत्र: अंता और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र
नया अपडेट:
लहसुन की खेती कैसे करे?
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| Lahsun |
लहसुन की उन्नत खेती: बुवाई से लेकर कमाई तक की पूरी जानकारी
लहसुन (Garlic) न केवल एक मसाला है, बल्कि यह अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। भारत में इसकी मांग साल भर रहती है, जिससे किसानों को इसका अच्छा भाव मिलता है। आइए जानते हैं कि लहसुन की खेती को सफल कैसे बनाया जाए।
1. उपयुक्त समय और जलवायु
लहसुन की खेती के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।
बुवाई का समय: उत्तर भारत में अक्टूबर से नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है।
तापमान: कंद (bulb) बनने के समय 15°C से 25°C का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है।
2. मिट्टी का चयन और खेत की तैयारी
लहसुन के लिए दोमट मिट्टी (Loamy Soil) सबसे उत्तम है।
खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।
खेत की तैयारी के समय 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिलाएं। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 2-3 बार जुताई करें।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
अच्छी पैदावार के लिए अपने क्षेत्र के हिसाब से किस्मों का चुनाव करें:
जी-1 (यमुना सफेद): यह किस्म निर्यात के लिए अच्छी है।
जी-41: इसके कंद बड़े और सफेद होते हैं।
जी-282: यह जल्दी पकने वाली किस्म है।
भीमा पर्पल: इसका रंग हल्का बैंगनी होता है और पैदावार अधिक मिलती है।
4. बुवाई की विधि
लहसुन की बुवाई बीज से नहीं, बल्कि इसकी कलियों (Cloves) से की जाती है।
बीज दर: एक एकड़ के लिए लगभग 2 से 2.5 क्विंटल स्वस्थ कलियों की आवश्यकता होती है।
दूरी: कतार से कतार की दूरी 15 सेमी और कलियों के बीच की दूरी 8 से 10 सेमी रखें।
गहराई: कलियों को मिट्टी में 3-5 सेमी गहरा गाड़ें।
5. सिंचाई प्रबंधन
पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करें।
सर्दी के मौसम में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करते रहें।
ध्यान रहे, खुदाई से 15-20 दिन पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए ताकि कंद अच्छी तरह सूख सकें।
6. खाद और उर्वरक
लहसुन को पोषक तत्वों की अधिक आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर 100 किलो नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस और 50 किलो पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही, सल्फर का उपयोग कंदों की चमक और गंध बढ़ाने में मदद करता है।
7. रोग और कीट नियंत्रण
थ्रिप्स (Thrips): यह लहसुन का प्रमुख कीट है जो पत्तियों का रस चूसता है। इसके बचाव के लिए नीम का तेल या विशेषज्ञ की सलाह से कीटनाशक का प्रयोग करें।
झुलसा रोग (Blight): पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखने पर फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
8. खुदाई और भंडारण
जब लहसुन की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब समझ लें कि फसल तैयार है। खुदाई के बाद लहसुन को 2-3 दिन छाया में सुखाएं। इसके बाद इसकी छंटाई करके सूखे स्थान पर स्टोर करें।
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