📍 अंता, राजस्थान
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हमारे बारे में
द्वारकी लाल कुशवाह फार्म राजस्थान के अंता (बारां) क्षेत्र का एक प्रमुख कृषि केंद्र है। हम शुद्धता और आधुनिक खेती के तरीकों पर विश्वास करते हैं।
- 🌱 स्थान: नागदा की झोपड़ियाँ, ठिकारिया, अंता (राजस्थान)
- 🚜 विशेषता: उन्नत कृषि तकनीक और पशुपालन
- 📍 सेवा क्षेत्र: अंता और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र
नया अपडेट:
सरसो की खेती कैसे करे?
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| Sarso |
सरसों की खेती: कम लागत में बंपर पैदावार पाने का सही तरीका
भारत में सरसों एक प्रमुख तिलहन (Oilseed) फसल है। राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसे बड़े स्तर पर उगाया जाता है। सरसों की खेती न केवल कम पानी में संभव है, बल्कि यह किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा भी देती है।
1. बुवाई का सही समय और जलवायु
सरसों एक रबी की फसल है जिसे ठंडी और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है।
सही समय: 15 सितंबर से 30 अक्टूबर के बीच बुवाई करना सबसे अच्छा माना जाता है।
तापमान: अंकुरण के समय 25°C से 30°C और फसल पकते समय ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है।
2. मिट्टी और खेत की तैयारी
सरसों के लिए बलुई दोमट (Sandy Loam) मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है।
सबसे पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करें।
मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए पाटा (Leveler) चलाएं ताकि नमी सुरक्षित रहे।
खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 4-5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालना बहुत फायदेमंद होता है।
3. उन्नत किस्में (Improved Varieties)
अच्छी पैदावार के लिए बीज का चयन सोच-समझकर करें:
पूसा मस्टर्ड (Pusa Mustard-25, 27, 28)
RH-30 और RH-749
गिरिराज (यह किस्म राजस्थान के किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय है)
4. बीज की मात्रा और उपचार
मात्रा: एक एकड़ के लिए लगभग 1.5 से 2 किलो बीज पर्याप्त होता है।
बीज उपचार: मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बीज को थीरम (Thiram) या कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) से उपचारित जरूर करें।
दूरी: कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-12 सेमी रखनी चाहिए।
5. खाद और उर्वरक का प्रबंधन
सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर (गंधक) का बहुत बड़ा महत्व है।
बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ 10-15 किलो सल्फर प्रति एकड़ जरूर डालें।
इससे दानों में चमक आती है और तेल का प्रतिशत बढ़ता है।
6. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
सरसों को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती।
पहली सिंचाई: फूल आने से ठीक पहले (बुवाई के 30-35 दिन बाद)।
दूसरी सिंचाई: फलियाँ बनते समय (बुवाई के 65-70 दिन बाद)।
खरपतवार हटाने के लिए बुवाई के 20-25 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें।
7. कीट और रोग नियंत्रण
सरसों की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान चेपा (Aphids) कीट पहुँचाते हैं।
इसके बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें या कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग करें।
यदि किसान भाई सही समय पर बुवाई करें, सल्फर का प्रयोग करें और समय पर कीटों से बचाव करें, तो सरसों की खेती से बहुत अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
